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History about syatoria ( सटोरिया) Yaduvanshi Gotr

  सनातनी धर्म में हर किसी का गोत्र होता है। यह गोत्र किसी व्यक्ति विशेष या किसी गांव के नाम पर मिलता है। आज हम यदुवंश के सटोरिया( syatoria) गोत्र के बारे में बात करेंगे। सटोरिया (syatoria) गोत्र की कहां से शुरुआत हुई इसके बारे में कोई सटीक तथ्य नहीं मिला। हमारी खोज में पाया गया है कि इस गोत्र की उत्पत्ति बहरोड के आसपास कहीं से हुई है। सटोरिया(syatoria) गोत्र के लोग बहरोड से निकलकर राजस्थान और हरियाणा के कुछ क्षेत्र पर रहने लगे। बहरोड से निकलने के बाद सटोरिया(syatoria)गोत्र के लोग   सांटोर एवं  लम्बी अहीर( lambi) जिला (झुंझुनू)में जाकर बसे। आठ पीढ़ियों से सटोरिया(syatoria) गोत्र के लोग  लम्बी  अहीर(lambi ahir) में रह रहे है। लम्बी  अहीर(lambi ahir) में सटोरिया(syatoria)गोत्र के पहले व्यक्ति बाबा हुकमारामजी थे। आज भी बाबा हुकमाराम जी के पीढ़ी के कुछ लोग गांव में ही रहते हैं। बाबा हुकमाराम जी की पीढ़ी के ही कुछ लोगों ने गांव से निकल कर बास लम्बी  ( baslambi) बसाया जो पटौदी के पास स्थित है। बाबा भक्ताराम बासलम्बी ( baslambi) गांव के संस्थापक थे जो कि ...

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